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गुरु ही मनुष्य के मन मस्तिष्क में ज्ञान का सृजन कर उसके भाग्य का उदय कर सकते हैं महंत राजेंद्र दास महाराजहरिद्वार 

विजय कुमार बंसल हरिद्वार ब्यूरो

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हरिपुर कला स्थित ए एन डी पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित दिव्य एवं भव्य श्री सीताराम महायाज्ञ सत्र की पूर्णाहुति के पावन अवसर पर आज एक विराट संत समागम का आयोजन प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री रामानंदाचार्य श्री अयोध्या दास जी महाराज के पतित-पावन एवं दिव्य सानिध्य में संपन्न हुआ। इस आध्यात्मिक आयोजन में देश के विभिन्न स्थानों से पधारे संत-महात्माओं ने अपने अमृतमय वचनों से श्रद्धालुओं के अंतःकरण को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से आलोकित किया। संपूर्ण वातावरण श्रीराम नाम, गुरु वंदना और गंगा मैया के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

सभा को संबोधित करते हुए नरसिंह धाम के महंत श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने कहा कि गुरु हमारे जीवन की वह दिव्य निधि हैं, जिनकी कृपा से अज्ञानरूपी अंधकार समाप्त होकर ज्ञानरूपी सूर्य का उदय होता है। गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाले दिव्य सेतु हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन तब तक अधूरा है जब तक उसे गुरु का सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त नहीं होता। गुरु जीवन की दिशा बदल देते हैं और भटके हुए जीव को सत्य के मार्ग पर स्थापित करते हैं।प्रातः स्मरणीय श्री रामानंदाचार्य श्री अयोध्या दास जी महाराज ने अपने श्रीमुख से भगवान श्रीराम की अनंत महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम केवल त्रेता युग के नायक नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के आदर्श, धर्म और मर्यादा के आधार हैं। भगवान राम का नाम ही ऐसा महामंत्र है, जो मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट कर आत्मा को निर्मल बना देता है। उन्होंने कहा कि जिस हृदय में राम बसते हैं, वहां भय, मोह और दुख का कोई स्थान नहीं रहता। राम नाम जीवन का आधार है और कलियुग में मुक्ति का सबसे सरल साधन भी।साध्वी वैष्णवी जी महाराज ने गुरु कृपा और राम नाम की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु की कृपा के बिना भक्ति का मार्ग खुलना अत्यंत कठिन है। गुरु ही भक्त के अंतःकरण में भक्ति का बीज बोते हैं और राम नाम उस बीज को विशाल वृक्ष बनाकर जीवन को फलदायी बना देता है। उन्होंने कहा कि भगवान राम का स्मरण करने मात्र से हृदय में शांति और जीवन में स्थिरता आती है।बाबा हाथ योगी जी महाराज ने कहा कि गुरु की महिमा अनंत है। गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा इसलिए कहा गया है क्योंकि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। गुरु का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और जिसके जीवन में गुरु कृपा हो, उसका पतन कभी नहीं होता।महंत श्री रघुवीर दास जी महाराज ने कहा कि संतों का संग मनुष्य के जीवन को बदल देता है। संत समाज केवल उपदेश नहीं देता, बल्कि अपने आचरण से धर्म की स्थापना करता है। उन्होंने कहा कि गुरु, भगवान और संत—ये तीनों जीवन के आधार स्तंभ हैं

महंत विष्णु दास जी महाराज ने अपने विचारों में कहा कि गुरु का स्मरण जीवन में स्थिरता और शक्ति प्रदान करता है। गुरु कृपा से मनुष्य के भीतर छिपी दिव्यता जागृत होती है। उन्होंने कहा कि श्रीराम की महिमा ऐसी है कि उनका नाम लेने मात्र से पत्थर भी तर जाते हैं, तो मनुष्य का उद्धार होना स्वाभाविक हैमहंत बिहारी शरण जी महाराज ने भगवान श्रीराम के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीराम त्याग, प्रेम, मर्यादा और सत्य के सर्वोच्च प्रतीक हैं। यदि मनुष्य अपने जीवन में श्रीराम के आदर्शों को उतार ले, तो उसका जीवन स्वतः सफल हो जाता है। उन्होंने कहा कि राम कथा और राम नाम दोनों ही जीवन को पवित्र करने वाले दिव्य साधन हैं।महंत हरेंद्र दास जी महाराज ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु के चरणों की धूल भी जीवन का कल्याण करने वाली होती है। गुरु की सेवा और आज्ञा का पालन करने वाला शिष्य कभी अधोगति को प्राप्त नहीं होता। गुरु का प्रेम ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है।महंत जयराम दास जी महाराज ने मां गंगा भागीरथी की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवनधारा हैं। गंगा का जल अमृत के समान पवित्र है और उसके दर्शन, स्पर्श और स्नान मात्र से मनुष्य के पापों का क्षय होता है। उन्होंने कहा कि मां गंगा मोक्षदायिनी हैं और उनके तट पर साधना करने से अनंत पुण्य की प्रप्ति होती है।स्वामी अंकित शरण जी महाराज ने कहा कि गुरु और गंगा दोनों ही जीवन को पवित्र करने वाले दिव्य तत्व हैं। गुरु आत्मा को निर्मल करते हैं और गंगा शरीर एवं मन को शुद्ध करती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम की कृपा और गुरु का आशीर्वाद यदि जीवन में मिल जाए, तो मनुष्य का कल्याण सुनिश्चित है।

महंत सूरज दास जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य भक्ति, सेवा, साधना और सत्संग है। संसार का सुख क्षणिक है, परंतु भगवान का स्मरण और गुरु की कृपा शाश्वत है। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य राम नाम का आश्रय लेता है, उसका जीवन आनंद और शांति से भर जाता है।इस दिव्य संत समागम में संतों के पावन वचनों ने श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, गुरु सेवा और गंगा महिमा के महत्व का बोध कराया। आयोजन स्थल पर उपस्थित भक्तों ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य माना। संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण, वेद मंत्रों की गूंज, राम नाम संकीर्तन और जय गंगे के उद्घोष से आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण दिखाई दिया। यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति, गुरु परंपरा और सनातन संस्कृति के दिव्य संगम का अद्भुत उदाहरण बनकर सभी के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया। इस अवसर पर महंत विष्णु दास जी महाराज महंत दुर्गादास जी महाराज महंत रघुवीर दास महाराज महंत बिहारी शरण महाराज स्वामी अंकित शरणमहाराज महंत हरिदास महाराज महंत नागा बाबा गजेंद्र गिरी महाराज कोतवाल रामदास महाराज कोतवाल धर्मदास महाराज कोतवाल कालीचरण महाराज कोतवाल श्याम गिरी महाराज सहित भारी संख्या में अनेकों मठ मंदिर आश्रमों से आए संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे

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